यमुनोत्री में यमुना नदी का मंदिर है जिसको जयपुर की महारानी गुलेरिया ने 19वीं सदी में बनवाया था परन्तु भूकंप की वजह से मंदिर क्षतिग्रस्त हो गया जिसका पुर्ननिर्माण टिहरी गढ़वाल के राजा प्रताप शाह ने करवाया। यमुनोत्री मंदिर उत्तरकाशी जिले के बड़कोट तहसील में स्थित है जिसकी समुद्र तल से ऊंचाई 3235 मी है। इस स्थान को पौराणिक काल में असित मुनि का निवास स्थान भी माना जाता है। यंहा तक पहुँचने का मोटर मार्ग हनुमान चट्टी तक ही है उसके उपरांत पैदल रास्ता नारद चट्टी, फूल चट्टी और जानकी चट्टी होकर गुजरता है। जानकी चट्टी का नाम एक महिला के नाम पर पड़ा जिन्होंने वंहा सर्वप्रथम एक धर्मशाला का निर्माण कराया। यंहा जाने का सर्वोत्तम समय मई से अक्टूबर है उसके उपरांत यंहा सब हिमाच्छादित हो जाता है. मुझे यंहा का खाना बहुत ही सादा लगा।
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मंगलवार, 11 अक्टूबर 2016
गुरुवार, 7 जुलाई 2016
हरिद्वार से बड़कोट की यात्रा
हम हरिद्वार लगभग साढ़े छः बजे पहुंचे जिसके बाद हमने सबसे पहला काम आगे की यात्रा के लिए साधन की तलाश करना शुरु किया। वंहा सभी टैक्सी और प्राइवेट बस ऑपरेटर ने यूनियन बना रखी है जिससे चार धाम या अन्य जगह जाने का रेट प्रतिदिन बदलता रहता है। खैर एक मिनी बस एक घंटे बाद मिली जिसमें प्रति व्यक्ति 2600 ₹ किराया तय हुआ जिस हिसाब से चार व्यक्तियों का 10400₹ का भुगतान हुआ। यंहा पर हम लोगों से एक गलती हो गयी हमने सीट पकड़ने में विलम्ब कर दिया जिसकी वजह से हमें पीछे वाली सीट मिली बस की पीछे की सीट में धक्के बहुत ज्यादा लगते है जिससे पूरे सफ़र हमारी हालत ख़राब रही। बस हरिद्वार से निकली और देहरादून और मसूरी होते हुए आगे बढ़ी। देहरादून से पहाड़ी इलाका शुरू हो जाता है। मसूरी भी बढ़िया हिल स्टेशन है।
हरिद्वार से यमुनोत्री की दूरी 250 किमी के लगभग है। हम हरिद्वार से बड़कोट पहुंचे जंहा पर रात्रि विश्राम किया। बड़कोट को 2014 में ही नगरपालिका का दर्जा मिला है। बड़कोट को सहस्त्रबाहु की नगरी भी कहा जाता है। यह भी एक सुंदर नगर है।![]() |
| रास्ते में |
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| मसूरी रोड मे स्थित मन्दिर |
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| मनोरम दृश्य |
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| मसूरी का दृश्य |
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| यंहा नाश्ता किये थे |
बुधवार, 6 जुलाई 2016
चार धाम की यात्रा
बहुत दिनों से इच्छा थी उत्तराखंड घूमने की और खासकर उत्तराखंड के चार धाम घूमने की तो इच्छा पूरी हुई इस साल। दोस्त वही थे जिनके साथ साल में एक यात्रा तो अवश्य होती है। पहले यात्रा का कार्यक्रम बना जुलाई महीने का फिर मानसून को देखते हुए इसे जून में ही करने का निर्णय हुआ और यात्रा की तिथि तय हुई 7 जुलाई। ट्रेन का कन्फर्म टिकट ना मिलता देख मैंने पता किया तो पता चला की upsrtc की volvo ac बस लखनऊ चारबाग़ बस अड्डे से प्रतिदिन चलती है इसलिए सात तारीख का रेजर्वेशन करा लिया गया इसमें भी बड़ा धोखा हुआ जिसकी चर्चा आगे करेंगे।बस का समय था साढ़े आठ बजे हम लोग समय से एक घंटे पहले पहुँच गए और वहीं हुआ जो अमूमन होता है बस आधे घंटे देरी से। फिलहाल बस पकड़ ली गयी सफ़र 535 किमी का था हरिद्वार तक बस टिकट के हिसाब से। बस नौ बजे के बाद ही निकली। मुझे एसी बस के बजाय स्लीपर में यात्रा करना पसंद है ट्रेन के सफ़र में थकावट नहीं होती और सोने को भरपूर मिलता है तथा नए लोगो से मिलने का मौका भी। बस से हम लोग छःबजकर तीस मिनट पर हरिद्वार पहुंचे। हरिद्वार से हम पहुंचे यमुनोत्री जिसकी चर्चा अगली पोस्ट में।
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| हमारी बस |
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| रास्ते में यहीं चचाय नाश्ता हुआ |
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| रास्ते का सुन्दर दृश्य |
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| रास्ते में नदी |
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| हरिद्वार बस अड्डा |
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