शनिवार, 30 जून 2018

विकर्ण महाभारत का अनछुआ किरदार

मेरी हमेशा से ही इतिहास में रुचि रही है और खासकर धार्मिक इतिहास में। मौका मिलने पर मै कभी कभी धार्मिक पुस्तके और वीडियो देख करता हूँ तो मुझे एक नए पात्र के बारे में पता चला जिसका नाम विकर्ण है।

                        चरित्रवान व्यक्ति
विकर्ण दुर्योधन का तीसरा भाई था जो दुर्योधन और दुःशासन से छोटा था और यह एक चरित्रवान पात्र था जिसने कौरवो को समय समय पर धर्म की उचित सलाह दी । द्रौपदी के चीरहरण के समय विदुर की तरह इसका पुरजोर विरोध किया हालांकि उसकी बात अनसुनी कर दी गयी।

                    तीसरा भाई
विकर्ण कौरवों का तीसरा भाई था जिसकी अस्त्र शस्त्र की शिक्षा कृपाचार्य, द्रौणाचार्य और भीष्म की देखरेख में हुई थी । विकर्ण भी एक महान धर्नुधारी था। डॉ पी वी नाथ द्वारा लिखी गई गीता में विकर्ण को एक महान धर्नुधारी बताया गया है।

                      युद्धकाल
महाभारत युद्ध में इसने चित्रयोधिन तथा चित्रयुद्ध का वध किया था तथा यह कौरव पक्ष के ग्यारह महारथियों में एक था।
                        मृत्यु
महाभारत  के युद्ध मे वह जानता था कि वह दुर्योधन था अधर्म का साथ दे रहा है परंतु उसने भाई का धर्म निभाते हुए युद्ध में अपने प्राण न्योछावर कर दिए । इस युद्ध मे विकर्ण का वध भीम ने न चाहते हुए भी किया क्योंकि विकर्ण ने द्रौपदी के चीरहरण का भरसक विरोध किया था इसलिए भीम की सहानुभूति विकर्ण से थी अतः भीम ने विकर्ण से युद्ध न करने की इच्छा प्रकट की परन्तु विकर्ण ने कहा कि उस समय भाई की पत्नी के सम्मान की रक्षा करना उसका कर्तव्य था और अब भाई के लिए युद्ध करना उसका कर्तव्य है तुम अपना कर्तव्य निभाओ और मै अपना । इस युद्ध में भीम के हाथों विकर्ण का वध हुआ।

शुक्रवार, 29 जून 2018

विकर्ण महाभारत का अनछुआ किरदार

मेरी हमेशा से ही इतिहास में रुचि रही है और खासकर धार्मिक इतिहास में। मौका मिलने पर मै कभी कभी धार्मिक पुस्तके और वीडियो देख करता हूँ तो मुझे एक नए पात्र के बारे में पता चला जिसका नाम विकर्ण है।

                        चरित्रवान व्यक्ति
विकर्ण दुर्योधन का तीसरा भाई था जो दुर्योधन और दुःशासन से छोटा था और यह एक चरित्रवान पात्र था जिसने कौरवो को समय समय पर धर्म की उचित सलाह दी । द्रौपदी के चीरहरण के समय विदुर की तरह इसका पुरजोर विरोध किया हालांकि उसकी बात अनसुनी कर दी गयी।

                    तीसरा भाई
विकर्ण कौरवों का तीसरा भाई था जिसकी अस्त्र शस्त्र की शिक्षा कृपाचार्य, द्रौणाचार्य और भीष्म की देखरेख में हुई थी । विकर्ण भी एक महान धर्नुधारी था। डॉ पी वी नाथ द्वारा लिखी गई गीता में विकर्ण को एक महान धर्नुधारी बताया गया है।

                      युद्धकाल
महाभारत युद्ध में इसने चित्रयोधिन तथा चित्रयुद्ध का वध किया था तथा यह कौरव पक्ष के ग्यारह महारथियों में एक था।
                        मृत्यु
महाभारत  के युद्ध मे वह जानता था कि वह दुर्योधन था अधर्म का साथ दे रहा है परंतु उसने भाई का धर्म निभाते हुए युद्ध में अपने प्राण न्योछावर कर दिए । इस युद्ध मे विकर्ण का वध भीम ने न चाहते हुए भी किया क्योंकि विकर्ण ने द्रौपदी के चीरहरण का भरसक विरोध किया था इसलिए भीम की सहानुभूति विकर्ण से थी अतः भीम ने विकर्ण से युद्ध न करने की इच्छा प्रकट की परन्तु विकर्ण ने कहा कि उस समय भाई की पत्नी के सम्मान की रक्षा करना उसका कर्तव्य था और अब भाई के लिए युद्ध करना उसका कर्तव्य है तुम अपना कर्तव्य निभाओ और मै अपना । इस युद्ध में भीम के हाथों विकर्ण का वध हुआ।

रविवार, 16 अप्रैल 2017

कोलकाता, गुवाहाटी, शिलांग, चेरापूंजी की यात्रा २

कोलकाता हम दो बजे पहुंच गये। एयरपोर्ट से बाहर निकलते ही वातानुकूलित बस मिल गई जिसके जरिये हम हावड़ा पहुंच गये। वंहा होटल तलाश किया तो न्यू अशोका होटल एक गली में मिला गया। होटल ठीक ठाक था इसलिए हमने कमरा बुक कर लिया किराया ९०० रूपये के लगभग था। कमरे पहुंच कर तुरंत सामान रखा और तरोताजा होकर निकल लिए बस अड्डे की ओर वंहा जाकर पता चला कि ४८ नं की बस दक्षिणेश्वर काली मंदिर जाती है तो हमने सोचा कि उसी से निकल पडे पर वो काफी देरी से थी तो हमने एक आटो वाले से ३०० रूपये में तय किया। आटो वाला आटो चलाने में काफी तेज था पर फिर भी जाम की वजह से हमें मंदिर तक पहुंचने में ४५ मिनट का समय लग ही गया। वंहा जब हम पहुंचे तब लाइन लगनी शुरू ही हुई थी कि हम पहुंच गये खैर थोड़ी देर बाद ही आरती शुरू हो गई आरती खत्म होने के बाद मंदिर के पट माँ के दर्शन हेतु खुले। दक्षिणेश्वर काली माता के दर्शन करने पश्चात हमें थोडी देर के इंतजार के बाद बस मिल गई जिसका प्रति व्यक्ति किराया १० रूपये मात्र था इतनी दूरी तय करने के आटो वाले पांच सौ रूपये तक मांग रहे थे। हावड़ा पहुंच कर वंहा एक लिट्टी चोखा की दुकान मिल गई जिसके लिट्टी चोखा खाकर आनंद आ गया। शेष अगली पोस्ट में

शुक्रवार, 14 अप्रैल 2017

कोलाकाता, गुवाहाटी, शिलांग, चेरापूंजी की यात्रा १

इस बार हमारा कोलकाता गुवाहाटी शिलांग घूमने का विचार बना तो हम ट्रेन के लिए पता करने लगे। ट्रेन मे सीटों की उपलब्धता भी मिली पर फिर विचार आया कि क्यों ना फ्लाइट के बारे मे पता किया जाये पता चला कि लखनऊ से ११ः५५ पर फ्लाइट है जिसका तीन लोगों का किराया ७६७३ रूपये मात्र है। टिकट की कीमत किफायती लगी और समय बचाने लिए भी फ्लाइट की यात्रा ठीक लगी इसलिए टिकट तीन लोगों की बुक कर ली गई पर हाँ टिकट हमने २२ मार्च को बुक की थी और यात्रा की तारीख थी ०५ अप्रैल तो यात्रा से जितना पहले आप फ्लाइट टिकट बुक करते है उतनी सस्ती टिकट आप प्राप्त कर सकते है खैर घर से हम ०८ बजे निकले और १० बजे पहुंच गए एयरपोर्ट वंहा ११ बजे तक घूमते और फोटोग्राफी करते रहे फिर उसके बाद सामान की स्केनिंग के बाद इंडिगो के काउंटर पर चेकइन किया व सामान उनको सौंपा। फ्लाइट ने १५ मिनट की देरी से उडान भरी। १ः५० पर हम कोलकाता पहुंच गये।

मंगलवार, 11 अक्तूबर 2016

यमुनोत्री


यमुनोत्री में यमुना नदी का मंदिर है जिसको जयपुर की महारानी गुलेरिया ने 19वीं सदी में बनवाया था परन्तु भूकंप की वजह से मंदिर क्षतिग्रस्त हो गया जिसका  पुर्ननिर्माण टिहरी गढ़वाल के राजा प्रताप शाह ने करवाया। यमुनोत्री मंदिर उत्तरकाशी जिले के बड़कोट तहसील में स्थित है जिसकी समुद्र तल से ऊंचाई 3235 मी है। इस स्थान को पौराणिक काल में असित मुनि का निवास स्थान भी माना जाता है। यंहा तक पहुँचने का मोटर मार्ग हनुमान चट्टी तक ही है उसके उपरांत पैदल रास्ता नारद चट्टी, फूल चट्टी और जानकी चट्टी होकर गुजरता है। जानकी चट्टी का नाम एक महिला के नाम पर पड़ा जिन्होंने वंहा सर्वप्रथम एक धर्मशाला का निर्माण कराया। यंहा जाने का सर्वोत्तम समय मई से अक्टूबर है उसके उपरांत यंहा सब हिमाच्छादित हो जाता है. मुझे यंहा का खाना बहुत ही सादा लगा।