| दक्षिण भारत का एक स्टेशन |
| सुन्दर पहाडी द्रश्य |
| सुन्दर प्रतिमा तिरूपति नगर मे स्थित |
| दक्षिण भारत का एक स्टेशन |
| सुन्दर पहाडी द्रश्य |
| सुन्दर प्रतिमा तिरूपति नगर मे स्थित |
कल इलाहाबाद गया था बहन को परीक्षा देनी थी जोकि शिक्षक भर्ती की परीक्षा थी तो इस परीक्षा में बडे परेशान हुए होना लाजिमी भी था क्योंकि परीक्षा कराने वाली संस्था ने अपने हिसाब से नियम जो बनाये थे। इस संस्था ने परीक्षार्थी को पास के परीक्षा केंन्द्र ना देकर दूर के परीक्षा केंन्द्र निर्धारित किये थे और वो भी २०० से ३०० किमी दूर। उसके पीछे कारण बस ये था कि परीक्षा कराने वाली संस्था ने विषयों के हिसाब से परीक्षा केंन्द्र निर्धारित किये थे। परन्तु उसने ये नहीं सोचा कि अपनी सुविधा के लिए परीक्षार्थियों को कितना परेशान कर रहा है।
जिस दिन परीक्षा थी उस दिन इलाहाबाद में सुबह से हीं बारिश हो रही थी। कई परीक्षार्थी जो सुबह जल्दी ही परीक्षा केंन्द्र पहुंच गये वंहा कोई सुविधा ना हौने के कारण सडक पर खडे होकर भीगते रहे। कोई गाजियाबाद तो कोई कुशीनगर और कोई गोरखपुर यानि कि उत्तरप्रदेश का हर शहर से लोग आये थे। लोगों का समय, रूपया तो व्यय हुआ ही साथ ही परेशानी अलग से ये है सरकारी कार्यप्रणाली।
उस पर इलाहाबाद की सडकें भी गजब ढा रही थी कहीं भी हमें ऐसी सडक नहीं मिली जोकि गड्डा मुक्त हो और बारिश कि वजह से जलभराव अपनी चरमसीमा पर था। बारिश में कपडें तो कम ही भींगे जूते और मोजे ज्यादा भीग गये। खैर परीक्षा ख्त्म होने के पश्चात हम स्टेशन आ गये जंहा भारतीय रेल की लेटलतीफ की कार्यप्रणाली के चलते सीमांचल एक्सप्रेस मिल गयी जोकि अपने समय से ढाई घन्टा देरी से चल रही थी वर्ना उसके बाद फिर साढे पांच बजे ही अगली ट्रैन हमें मिलती और वो भी देरी से आती जरूर। सुबह का किस्सा तो रह ही गया सुबह चार बजे जैसे तैसे हम स्टेशन पहुंचे तो ट्रैन पहले पंद्रह मिनट लेट थी जो धीरे धीरे करते हुए डेढ घन्टा लेट हो गयी। ट्रेन थी आनंद विहार मंडवाडीह एक्सप्रेस जोकि चार बजकर पचास मिनट पर थी पर आई छः बजे पहुंचना था सात बजकर तीस मिनट पर तो हम पहुंचे नौ बजकर तीस मिनट पर। खैर एक सबक मिला जोकि पहले भी पता था कि अगर ट्रेन से जाना है तो दो से तीन घन्टे की देरी के लिए तैयार रहे और विशेष परिस्थितियों उससे भी ज्यादा।
कोलकाता हम दो बजे पहुंच गये। एयरपोर्ट से बाहर निकलते ही वातानुकूलित बस मिल गई जिसके जरिये हम हावड़ा पहुंच गये। वंहा होटल तलाश किया तो न्यू अशोका होटल एक गली में मिला गया। होटल ठीक ठाक था इसलिए हमने कमरा बुक कर लिया किराया ९०० रूपये के लगभग था। कमरे पहुंच कर तुरंत सामान रखा और तरोताजा होकर निकल लिए बस अड्डे की ओर वंहा जाकर पता चला कि ४८ नं की बस दक्षिणेश्वर काली मंदिर जाती है तो हमने सोचा कि उसी से निकल पडे पर वो काफी देरी से थी तो हमने एक आटो वाले से ३०० रूपये में तय किया। आटो वाला आटो चलाने में काफी तेज था पर फिर भी जाम की वजह से हमें मंदिर तक पहुंचने में ४५ मिनट का समय लग ही गया। वंहा जब हम पहुंचे तब लाइन लगनी शुरू ही हुई थी कि हम पहुंच गये खैर थोड़ी देर बाद ही आरती शुरू हो गई आरती खत्म होने के बाद मंदिर के पट माँ के दर्शन हेतु खुले। दक्षिणेश्वर काली माता के दर्शन करने पश्चात हमें थोडी देर के इंतजार के बाद बस मिल गई जिसका प्रति व्यक्ति किराया १० रूपये मात्र था इतनी दूरी तय करने के आटो वाले पांच सौ रूपये तक मांग रहे थे। हावड़ा पहुंच कर वंहा एक लिट्टी चोखा की दुकान मिल गई जिसके लिट्टी चोखा खाकर आनंद आ गया। शेष अगली पोस्ट में
इस बार हमारा कोलकाता गुवाहाटी शिलांग घूमने का विचार बना तो हम ट्रेन के लिए पता करने लगे। ट्रेन मे सीटों की उपलब्धता भी मिली पर फिर विचार आया कि क्यों ना फ्लाइट के बारे मे पता किया जाये पता चला कि लखनऊ से ११ः५५ पर फ्लाइट है जिसका तीन लोगों का किराया ७६७३ रूपये मात्र है। टिकट की कीमत किफायती लगी और समय बचाने लिए भी फ्लाइट की यात्रा ठीक लगी इसलिए टिकट तीन लोगों की बुक कर ली गई पर हाँ टिकट हमने २२ मार्च को बुक की थी और यात्रा की तारीख थी ०५ अप्रैल तो यात्रा से जितना पहले आप फ्लाइट टिकट बुक करते है उतनी सस्ती टिकट आप प्राप्त कर सकते है खैर घर से हम ०८ बजे निकले और १० बजे पहुंच गए एयरपोर्ट वंहा ११ बजे तक घूमते और फोटोग्राफी करते रहे फिर उसके बाद सामान की स्केनिंग के बाद इंडिगो के काउंटर पर चेकइन किया व सामान उनको सौंपा। फ्लाइट ने १५ मिनट की देरी से उडान भरी। १ः५० पर हम कोलकाता पहुंच गये।
![]() |
| रास्ते में पुल |
![]() |
| यमुनोत्री मार्ग पर सुन्दर दृश्य |
![]() |
| बर्फ से ढकी चोटियाँ |
![]() |
| पहाड काट कर बनाया गया रास्ता |
![]() |
| साफ सुन्दर नीला आसमान |
![]() |
| मन्दिर जाते हुए रास्ते में |
![]() |
| चढाई चढते हुए |
![]() |
| रास्ते मे पुल |
![]() |
| मनमोहक दृश्य |
![]() |
| गर्म पानी का तप्त कुंड |
![]() |
| माँ यमुनोत्री का मंदिर |
![]() |
| ध्यान मुद्रा में |
![]() |
| रास्ते में |
![]() |
| मसूरी रोड मे स्थित मन्दिर |
![]() |
| मनोरम दृश्य |
![]() |
| मसूरी का दृश्य |
![]() |
| यंहा नाश्ता किये थे |
![]() |
| हमारी बस |
![]() |
| रास्ते में यहीं चचाय नाश्ता हुआ |
![]() |
| रास्ते का सुन्दर दृश्य |
![]() |
| रास्ते में नदी |
![]() |
| हरिद्वार बस अड्डा |
आज मै एक नए एप्प का प्रयोग कर रहा हूँ और उम्मीद करता हूँ कि इस एप्प की मदद से मैं लेखन की आदत विकसित कर सकूँगा और मन को शांत और संयमित कर सकूँगा. इस तरह प्रतिदिन लिखने से मन के विचार और स्पष्ट होंगे तथा विचारों में गहराव और सुलझाव होगा. इस नए एप्प का नाम है जर्नी JOYRNEY इसमें आप जब भी लिखेंगे तो वह तारीखवार स्वतः व्यवस्थित हो जायेगी. यंहा मै स्क्रीनशॉट लगा रहा हूँ जिससे आप इस एप्प को और समझ सकेंगे. आगे इस एप्प के साथ जो भी अनुभव होंगे वो मैं आपसे साझा करता रहूँगा.