रविवार, 15 नवंबर 2015

त्योहर बाद का जीवन

त्योहार बाद जब अपने बिखरते है तो कितना बुरा लगता है पर ये तो प्रकृति का नियम है कि बहार के बाद पतझड़ तो आएगा ही. हमें तो त्योहार बाद कुछ ऐसा लगता है कि जैसे कहीं घूमने गए थे और अब वापस लौट आये है। हमारे बुजुर्ग बहुत ही अनुभवी और मानवीय स्वभाव की गहरी समझ रखने वाले थे तभी उन्होंने त्योहार बनाये वर्ना परिवार के लोगो का आपस में मिलना बहुत मुश्किल हो जाता है। कभी कभी ऐसा लगता है कि सब लोग आगे बढ़ रहे है परन्तु मैं नहीं।  मानव जीवन और बहता हुआ समय एक बार ही मिलता है पर मुझे कभी-कभी लगता है कि मैंने उसको उतनी ही लापरवाही से खर्च कर दिया है पर क्या क्षतिपूर्ति संभव है नहीं परन्तु हाँ पिछली घटनाओं से सबक ले कर आगे का जीवन सुनहरा किया जा सकता है जिस प्रकार एक बच्चा गर्म दूध का अनुभव कर आगे से उसे ठंडा कर ही पीता है।
एक टिप्पणी भेजें