कोलकाता हम दो बजे पहुंच गये। एयरपोर्ट से बाहर निकलते ही वातानुकूलित बस मिल गई जिसके जरिये हम हावड़ा पहुंच गये। वंहा होटल तलाश किया तो न्यू अशोका होटल एक गली में मिला गया। होटल ठीक ठाक था इसलिए हमने कमरा बुक कर लिया किराया ९०० रूपये के लगभग था। कमरे पहुंच कर तुरंत सामान रखा और तरोताजा होकर निकल लिए बस अड्डे की ओर वंहा जाकर पता चला कि ४८ नं की बस दक्षिणेश्वर काली मंदिर जाती है तो हमने सोचा कि उसी से निकल पडे पर वो काफी देरी से थी तो हमने एक आटो वाले से ३०० रूपये में तय किया। आटो वाला आटो चलाने में काफी तेज था पर फिर भी जाम की वजह से हमें मंदिर तक पहुंचने में ४५ मिनट का समय लग ही गया। वंहा जब हम पहुंचे तब लाइन लगनी शुरू ही हुई थी कि हम पहुंच गये खैर थोड़ी देर बाद ही आरती शुरू हो गई आरती खत्म होने के बाद मंदिर के पट माँ के दर्शन हेतु खुले। दक्षिणेश्वर काली माता के दर्शन करने पश्चात हमें थोडी देर के इंतजार के बाद बस मिल गई जिसका प्रति व्यक्ति किराया १० रूपये मात्र था इतनी दूरी तय करने के आटो वाले पांच सौ रूपये तक मांग रहे थे। हावड़ा पहुंच कर वंहा एक लिट्टी चोखा की दुकान मिल गई जिसके लिट्टी चोखा खाकर आनंद आ गया। शेष अगली पोस्ट में
रविवार, 16 अप्रैल 2017
शुक्रवार, 14 अप्रैल 2017
कोलाकाता, गुवाहाटी, शिलांग, चेरापूंजी की यात्रा १
इस बार हमारा कोलकाता गुवाहाटी शिलांग घूमने का विचार बना तो हम ट्रेन के लिए पता करने लगे। ट्रेन मे सीटों की उपलब्धता भी मिली पर फिर विचार आया कि क्यों ना फ्लाइट के बारे मे पता किया जाये पता चला कि लखनऊ से ११ः५५ पर फ्लाइट है जिसका तीन लोगों का किराया ७६७३ रूपये मात्र है। टिकट की कीमत किफायती लगी और समय बचाने लिए भी फ्लाइट की यात्रा ठीक लगी इसलिए टिकट तीन लोगों की बुक कर ली गई पर हाँ टिकट हमने २२ मार्च को बुक की थी और यात्रा की तारीख थी ०५ अप्रैल तो यात्रा से जितना पहले आप फ्लाइट टिकट बुक करते है उतनी सस्ती टिकट आप प्राप्त कर सकते है खैर घर से हम ०८ बजे निकले और १० बजे पहुंच गए एयरपोर्ट वंहा ११ बजे तक घूमते और फोटोग्राफी करते रहे फिर उसके बाद सामान की स्केनिंग के बाद इंडिगो के काउंटर पर चेकइन किया व सामान उनको सौंपा। फ्लाइट ने १५ मिनट की देरी से उडान भरी। १ः५० पर हम कोलकाता पहुंच गये।
मंगलवार, 11 अक्टूबर 2016
यमुनोत्री
रविवार, 18 सितंबर 2016
बड़कोट से यमुनोत्री की यात्रा
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| रास्ते में पुल |
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| यमुनोत्री मार्ग पर सुन्दर दृश्य |
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| बर्फ से ढकी चोटियाँ |
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| पहाड काट कर बनाया गया रास्ता |
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| साफ सुन्दर नीला आसमान |
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| मन्दिर जाते हुए रास्ते में |
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| चढाई चढते हुए |
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| रास्ते मे पुल |
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| मनमोहक दृश्य |
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| गर्म पानी का तप्त कुंड |
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| माँ यमुनोत्री का मंदिर |
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| ध्यान मुद्रा में |
गुरुवार, 7 जुलाई 2016
हरिद्वार से बड़कोट की यात्रा
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| रास्ते में |
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| मसूरी रोड मे स्थित मन्दिर |
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| मनोरम दृश्य |
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| मसूरी का दृश्य |
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| यंहा नाश्ता किये थे |
बुधवार, 6 जुलाई 2016
चार धाम की यात्रा
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| हमारी बस |
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| रास्ते में यहीं चचाय नाश्ता हुआ |
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| रास्ते का सुन्दर दृश्य |
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| रास्ते में नदी |
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| हरिद्वार बस अड्डा |
शुक्रवार, 1 अप्रैल 2016
नया एप्प नई उम्मीद
आज मै एक नए एप्प का प्रयोग कर रहा हूँ और उम्मीद करता हूँ कि इस एप्प की मदद से मैं लेखन की आदत विकसित कर सकूँगा और मन को शांत और संयमित कर सकूँगा. इस तरह प्रतिदिन लिखने से मन के विचार और स्पष्ट होंगे तथा विचारों में गहराव और सुलझाव होगा. इस नए एप्प का नाम है जर्नी JOYRNEY इसमें आप जब भी लिखेंगे तो वह तारीखवार स्वतः व्यवस्थित हो जायेगी. यंहा मै स्क्रीनशॉट लगा रहा हूँ जिससे आप इस एप्प को और समझ सकेंगे. आगे इस एप्प के साथ जो भी अनुभव होंगे वो मैं आपसे साझा करता रहूँगा.
रविवार, 15 नवंबर 2015
त्योहर बाद का जीवन
शनिवार, 24 अक्टूबर 2015
बेंजामिन फ्रैंकलिन
इधकर कुछ दिनों से बेंजामिन फ्रैंकलिन की आत्मकथा पढ़ रहा हूँ । बहुत ही धनी व्यक्तिव और बहुआयामी प्रतिभा के धनी थे बेंजामिन फ्रैंकलिन । एक आविष्कारक, राजनीतिज्ञ और समाज सुधारक की भूमिका में थे वे । उनका जीवन अनुकरणीय है युवाओं के लिए कि कैसे संघर्षो का सामना किया ज़ाए । उनके आत्म कथा अपने पुत्र को लिखे पत्र के प्रारूप में है पर लिखने की शैली रुचिकर है अपनी आत्म कथा में इन्होंने अपने परिवार के इतिहास का भी बखूबी वर्णन किया है। बेंजामिन फ्रैंकलिन को शुरुआत से ही किताबों का पढ़ने का शौक था जिसने उनके व्यक्तिव पर गहरा प्रभाव डाला. उस समय उन्होंने उन कामो को अंजाम दिया जो हमें बहुत ही मुश्किल लगते है.
























