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| अमरनाथ जाते हुए मार्ग मे |
शा से ही लकीर का फ़क़ीर रहा कारण कि मैं हमेशा अलग परिणाम की चाह में योजनाएँ बनाता पर कुछ ही दिनों मे फिर पुराने
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| अमरनाथ जाते हुए मार्ग मे |
चित्रकूट में मुझे तो बहुत अच्छा लगा वंह जो जगह मुझे सबसे ज्यादा पसंद आयी वो है राम दर्शन जंहा पहुँच कर ऐसा लगता है कि प्रभु श्री राम की जीवन की सारी घटनायें अपनी आँखों के सामने घटित हो रही है । राम दर्शन एक स्थान है जंहा पर प्रभु श्री राम के जीवन की सजीव झांकी है । उसके बाद मुझे रामघाट बहुत पंसद आया वंहा का वातावरण बहुत ही रमणीय लगा वंहा शाम की आरती भी दर्शनीय है । राम गंगा में एक चीज दुखी करती है वो है जंहा पर लोग स्नान करते है वंही पर नाले का पानी गिरता है ।चित्रकूट में पंडो की वसूली भी जबरदस्त है वंहा के पंडो ने एक नया तरीका ईजाद किया है रूपए लेने का किसी भी मंदिर में घुसते ही पुजारी आपके ऊपर गदा रखेगा और कहेगा अमुक व्यक्ति ने फंला रुपया दान दिया । लो जी अब जब घोषणा हो गई तो दान तो देना ही पड़ेगा । गुप्त गोदावरी गुफा में जब प्रवेश किया तभी उसकी प्राचीनता का एहसास हो जाता है । गुप्त गोदावरी में एक पवित्र एहसास होता है । वंहा जलधारा का निरंतर प्रवाह गुफा के अन्दर होता रहता है । सती अनुसूइआ आश्रम का सरोवर बहुत ही विशाल है जो बहुत ही स्वच्छ है जिसमे अनेको प्रकार की सुन्दर छोटी बड़ी मछलियाँ पाई जाती है ।कुल मिला कर चित्रकूट की यात्रा बहुत ही आनंदमयी रही । उसके बाद फिर हम माता मैहर वाली के दर्शन करने के लिए गए जिसकी चर्चा अगली कड़ी में
सुबह जल्दी ही हम सभी लोग तैयार हो गए । पहले हम लोग जानकी कुंड गए बताते है कि सीता माता यंहा स्नान करने आया करती थी । वंहा कुछ देर रुकने के उपरान्त हम लोग फिर राम दर्शन के लिए गए वंहा तो करीब एक घंटे हम लोग रुके । वंह पहुँच कर लगा जैसे प्रभु श्री राम की सारी जीवन गाथा सजीव हों गयी है । वंहा की झांकी में जितनी सजीविता है वैसी शायद ही कंही देखने को मिले । वंहा एक बात और अच्छी देखने को मिली वो ये कि रामायण जितनी भी विदेशी भाषाओं में लिखी गयी उन सबकी एक-एक प्रति वंहा पर मौजूद थी ।साथ ही चीन रूस फ्रांस आदि जितने भी देशो में रामायण का मंचन हुआ है वंहा की फोटो मौजूद थी । वंहा फोटो खीचना मना था इसलिए चाह कर भी फोटो नहीं खीच सका । इसके बाद हम लोग स्फटिक शिला देखने गए बताते है कि प्रभु श्री राम और माता सीता यंही पर बैठ कर चित्रकूट की सुन्दरता को निहारा करते थे । वंह पर माता सीता के पदचिन्ह अब भी मौजूद है ।
आज चित्रकूट की यात्रा पर निकला हूँ ।काफी दिन से मन था कि प्रभु श्री राम ने जहाँ अपने वनवास का अधिकतम समय व्यतीत किया उस परम पुनीत पुण्य भूमि के दर्शन करूँ । उस जगह में जरुर कोई खास बात बात होगी जिसके लिए इस भूमि का चयन किया । चलो अब दो दिन चित्रकूट के दर्शन ही होंगे ।अभी तो फिलहाल बाँदा स्टेशन पंहुचा हूँ । शेष बाद में ।